ट्रैवल पार्टनर बनाम ट्रैवल कम्पैनियन: अंतर जानना (और यह क्यों मायने रखता है)
किसी को "ट्रैवल पार्टनर" कहना और "ट्रैवल कम्पैनियन" कहना समान लगता है लेकिन बहुत अलग गतिशीलता का वर्णन करता है। यह जानना कि आप क्या चाहते हैं, बहुत सारे घर्षण को रोकता है।
डिजिटल नोमैड डेटिंग: अन्य स्थान-स्वतंत्र लोगों से मिलना
डिजिटल नोमैड के रूप में डेटिंग की विशिष्ट चुनौतियाँ हैं जिन्हें सामान्य सलाह संबोधित नहीं करती। यहाँ वह है जो वास्तव में काम करता है जब आप दोनों के पास कोई निश्चित पता नहीं है।
यात्रा साथी खोजने के लिए सर्वश्रेष्ठ शहर: एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका
एक व्यावहारिक विश्लेषण उन शहरों का जहां एकल यात्री वास्तव में संगत यात्रा साथियों से मिलते हैं — क्षेत्र, मौसम और भीड़ के प्रकार के अनुसार।
बैंकॉक भारतीय यात्री के लिए: बहुत टूरिस्ट, असली स्थानीय कौन है
बैंकॉक भारतीय यात्रियों के लिए एक टूरिस्ट शहर बन चुका है। असली स्थानीय लोगों से कहाँ मिलें, और डेटिंग ऐप पर क्या ढूँढें।
नासिक वाइन कंट्री: नए जोड़े का वीकेंड
नासिक वाइन कंट्री — सुला, ग्रोवर, यॉर्क के बीच एक छोटा वीकेंड। नए जोड़े के लिए शराब पर आधारित डेट की एक अलग तस्वीर।
राजधानी ट्रेन से सिटी टू सिटी डेट: असली बजट गणित
दिल्ली से मुंबई की राजधानी दो लोगों के लिए ₹7000 में पूरी रात का सफ़र। फ़्लाइट ₹12000। सिटी-टू-सिटी डेट की असली बजट गणित।
कोचीन-वर्कला रोड ट्रिप: तीसरी डेट का सच्चा प्लान
"कल कहीं घूमने चलें?" — "कहाँ?" तीसरी डेट पर पूछा गया यह सवाल एक छोटी रोड ट्रिप से जवाब पा सकता है। कोचीन-वर्कला का असली प्लान।
अप्रैल की दिल्ली डेटिंग के लिए सबसे ख़राब महीना क्यों है
पिछले साल अप्रैल में तीन दोस्तों के पाँच डेट — कोई भी दूसरी डेट नहीं हुई। अप्रैल दिल्ली में डेटिंग का सबसे दुश्मन महीना है, और क्यों।
गोवा का ऑफ़-सीज़न: एक नए जोड़े के लिए सच्ची तस्वीर
मान लेना चाहिए — पीक सीज़न गोवा नए जोड़े के लिए सबसे ख़राब जगह है। जून से सितंबर और जनवरी-फ़रवरी की असली तस्वीर, खाली बीच, खुले कैफ़े।
हिमाचल की सर्दी: कसौली का धीमा दूसरा डेट
दूसरी डेट के लिए शिमला जाने से बेहतर क्या है? कसौली। कम भीड़, छोटा क़स्बा, पैदल चलने के रास्ते। ट्रेन, बजट और असली टाइमिंग।
मुंबई के बांद्रा कोफ़ी हाउस को पहली डेट क्यों चुनना सही है
बांद्रा का एक शांत कोफ़ी हाउस पहली डेट के लिए मरीन ड्राइव से बेहतर क्यों है। असली पते, असली बजट, असली बातचीत की जगहें।